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मकर संक्रांति की अमिट महिमा

हिंदू त्योहार धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखते हैं। मकर संक्रांति भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना।

इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति वैदिक काल से जारी है। दरअसल मकर संक्रांति का संबंध ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। यह पर्व अपना धार्मिक महत्व भी रखता है। इस दिन उत्तरायण के समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि होती है, वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है।

मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायण में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इस दिन के बाद हर दिन तिल-तिल बढता है इसलिए इसे तिल सक्रांति भी कहते हैं। इस पर्व को खिचड़ी सक्रांति भी कहा जाता है।

हिंदू त्योहार धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखते हैं। इस बात को हम इन पंक्तियों द्वारा समझ सकते हैं।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

# मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं।

# द्वापर युग में महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था।

# उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा गया है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है।

# इसी दिन भागीरथ के तप के कारण गंगा मां नदी के रूप में पृथ्वी पर आईं थीं। और राजा सगर सहित भागीरथ के पूर्वजों को तृप्त किया था।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

# मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का महत्व बहुत है।

# मकर संक्रांति में उत्तर भारत में ठंड का समय रहता है। ऐसे में तिल-गुड़ का सेवन करने के बारे में विज्ञान भी कहता है। ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।

मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो राष्ट्रीय एकता और धार्मिक भावना को सुदृढ़ करता है। इस दिन भारत में मकर संक्रांति का पर्व, पूर्वी उत्तर भार में खिचड़ी पर्व, पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, केरल में अय्यपा दर्शन, पूर्वी भारत में बिहू आदि पर्वों की एक बड़ी श्रृंखला मनाई जाती है।

इस दिन गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर में तीन दिवसीय खिचड़ी मेला लगता है। इसके साथ ही भारत के अन्य शहरों में भी मेले लगते हैं।

महाराष्ट्र में इस दिन तिल-गुड़ का हलवा बनाया जाता है। आंध्रप्रदेश में पंचरत्न चटनी बनाकर खाई जाती है। उत्तरी भारत में जगह-जगह खिचड़ी मेले भरते हैं। और इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।

मकर संक्रांति पर्व

मकर संक्रांति इस वर्ष 14 जनवरी की रात्रि 1 बजकर 30 मिनट पर आ रही है। इसलिए इसका पुण्य संक्रांति काल दिनांक 15 को दिन 1 बजकर 24 मिनट तक विशेष व सूर्यास्त तक सामान्य पुण्यकाल रहेगा।

इस दिन तिल का उपयोग 06 तरह से किया जा सकता है। यानी तिल का उबटन, तिल मिले जल से स्नान, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीना और तिल का दान करना।

संक्रांति की स्थिति

संक्रांति के समय कीलक नाम का संवत्सर रहेगा। माघ कृष्ण नवमी के बाद दशमी तिथि, दिन बुधवार / गुरुवार, स्वाती नक्षत्र धृति उपरांत शूल योग, तात्कालिक वाणिज करण, तुला का चंद्र है। इस संक्रांति के बाद भगवान सूर्य उत्तरायन व शिशिर ऋतु का आरंभ होगा। इसमें तिल-गुड़ का दान, वस्त्र दान, कम्बल आदि गरम कपड़ों का दान एवं स्वर्णादि का दान यथाशक्ति करना चाहिए।

संक्रांति का वाहन

वाहन-महिष, उपवाहन- ऊंट, वस्त्र-श्याम कंचुकी(चोली), लेपन- महावर, पुष्पधारण- अर्क(अकोआ), रत्न- माणिक्य, पात्र- खप्पर, भोजन-दही, आयुध- तोमर, जाति-मृग, अवस्था-प्रौढ़, स्थिति- निविष्ठ, मुहूर्त- 15 , दृष्टि- वायव्य, गमन- पश्चिम, आगमन- पूर्व।

संक्राति का राशिफल

मेष-सम्मान, वृष- भय, मिथुन-ज्ञान, कर्क-कलह, सिंह- लाभ, कन्या- संतोष, तुला-धन, वृश्चिक- हानि, धनु- लाभ, मकर- इष्ट सिद्धि, कुंभ- धर्म लाभ, मीन-कष्ट।

 

 

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